दो चुनावों की हार के बाद डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह की शानदार वापसी, तिरहुत शिक्षक सीट पर दर्ज की जीत
एमएससी और पीएचडी के बाद बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में रहे प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष, 1996 से 2014 तक तीन बार रहे विधान परिषद सदस्य
मुजफ्फरपुर। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी समर्थित डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज कर विधान परिषद की राजनीति में शानदार वापसी की है। लंबे शैक्षणिक अनुभव, शिक्षकों के बीच पुराने जुड़ाव और राजनीतिक संघर्ष के बाद मिली इस जीत ने उनके सियासी सफर को फिर चर्चा में ला दिया है। पिछले दो चुनावों में हार का सामना करने के बाद उन्होंने इस बार निर्दलीय प्रत्याशी भूषण कुमार को 1300 से अधिक मतों से पराजित किया।
डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह का उच्च शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र से पुराना नाता रहा है। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से एमएससी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद इसी विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दीं। शिक्षण क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच उनकी पहचान बनी रही।
1996 से 2014 तक तीन बार बने विधान परिषद सदस्य
डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह का विधान परिषद का सफर भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1996 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इस चुनाव में उन्होंने सीपीआई नेता प्रो. परमानंद सिंह मदन को पराजित किया था। इसके बाद वह लगातार तीन कार्यकाल तक विधान परिषद के सदस्य रहे और वर्ष 2014 तक इस पद पर बने रहे।
लगातार तीन बार जीत हासिल करने के बाद उन्हें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक पहचान मिली। हालांकि, वर्ष 2014 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पिछले चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली और वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। लगातार दो चुनावों में हार के बावजूद उन्होंने चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
हार के बाद वापसी, मतगणना में बनाए रखी बढ़त
इस बार भाजपा ने डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह पर फिर भरोसा जताया। मतगणना के दौरान उन्होंने शुरुआती चरण से ही बढ़त बनाए रखी। अंततः उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी भूषण कुमार को 1300 से अधिक मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की।
इस परिणाम को उनके राजनीतिक सफर में वापसी के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक शिक्षक समुदाय से जुड़े रहने और पूर्व में विधान परिषद सदस्य के रूप में काम करने का अनुभव उनके चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
एनडीए के संयुक्त अभियान का मिला लाभ
डॉ. नरेंद्र सिंह ने अपनी जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को दिया। चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए के घटक दलों ने मिलकर अभियान चलाया। मंत्रियों, विधायकों और पूर्व सांसदों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपकर मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति बनाई गई।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में गठबंधन की सक्रियता और संगठनात्मक प्रयास भी चर्चा में रहे। हालांकि, जीत में विभिन्न कारकों की भूमिका का आकलन मतगणना के विस्तृत आंकड़ों और क्षेत्रवार मतदान के विश्लेषण से ही किया जा सकता है।
जन सुराज की एंट्री ने भी खींचा ध्यान
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में जन सुराज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण चर्चा का विषय रही। पार्टी ने अंतिम समय में श्यामनंदन कुमार यादव को प्रत्याशी बनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने प्रथम वरीयता के 1300 से अधिक मत हासिल किए।
नए राजनीतिक विकल्प के रूप में जन सुराज की मौजूदगी ने चुनाव में अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा पैदा की। इस चुनाव में पुराने राजनीतिक अनुभव, शिक्षक समुदाय से जुड़ाव, गठबंधन की सक्रियता और नए प्रत्याशियों की भागीदारी जैसे कई पहलू सामने आए।
डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह की जीत के साथ तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एक बार फिर उनका राजनीतिक सफर चर्चा के केंद्र में है। अब शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर उनकी आगामी भूमिका पर नजर रहेगी।