भागलपुर में 39 विवाहित महिलाओं ने छोड़ा ससुराल, पुराने प्रेम संबंध और घरेलू विवाद बने वजह
भागलपुर। जिले में वैवाहिक संबंधों से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस के सामने कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। वर्ष 2025 से अप्रैल 2026 तक विवाहित महिलाओं के घर छोड़ने से जुड़े 39 मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में पतियों ने अपनी पत्नियों की तलाश और बरामदगी के लिए पुलिस से गुहार लगाई है। इशाकचक, बरारी, जोगसर, तातारपुर, घोघा और नाथनगर समेत कई थाना क्षेत्रों में इस तरह की शिकायतें दर्ज हुई हैं।
कुछ मामलों में महिलाओं के घर छोड़ने के बाद चिट्ठी या मोबाइल संदेश मिलने की बात भी सामने आई है। कहीं पति को अलविदा कहने का संदेश मिला, तो कहीं महिला ने पत्र में अपनी अलग राह चुनने की बात लिखी। पुलिस के सामने ऐसे मामलों में महिला की तलाश करने के साथ-साथ उसके बयान और कानूनी अधिकारों को ध्यान में रखकर कार्रवाई करने की चुनौती रहती है।
इशाकचक में सबसे अधिक नौ मामले दर्ज
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 से अप्रैल 2026 के बीच दर्ज मामलों का थानावार विवरण इस प्रकार बताया गया है। इशाकचक में नौ, बरारी में सात, जोगसर में छह, तातारपुर में पांच, घोघा में चार और नाथनगर में पांच मामले दर्ज किए गए। अन्य थानों के तीन मामलों को मिलाकर कुल संख्या 39 बताई गई है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, कई मामलों में शादी के कुछ ही महीनों के भीतर विवाद सामने आए। मोबाइल पर बातचीत, पुराने प्रेम संबंध, पारिवारिक मतभेद और दहेज से जुड़े विवाद को भी शिकायतों में वजह बताया गया है। हालांकि, इन मामलों के कारणों और परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना जरूरी है।
मोबाइल पर बातचीत को लेकर विवाद के बाद घर छोड़ने का आरोप
इशाकचक थाना क्षेत्र के सुरेश मंडल ने 12 मार्च 2026 को अपनी पत्नी काजल के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। सुरेश का आरोप था कि शादी के तीन साल बाद उनकी पत्नी देर रात मोबाइल पर किसी से बातचीत करती थीं। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था।
शिकायत के मुताबिक, अगले दिन काजल घर पर एक चिट्ठी छोड़कर चली गईं। पत्र में कथित तौर पर उन्होंने अपनी अलग राह चुनने की बात लिखी थी। सुरेश ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन्हें पता चला कि काजल मुंगेर निवासी अपने पुराने परिचित विकास के साथ चली गई हैं और दोनों दिल्ली में रह रहे हैं।
इस मामले में सुरेश ने अपहरण का केस दर्ज कराया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काजल ने न्यायालय में बालिग होने और अपनी इच्छा से जाने की बात कही। ऐसे मामलों में महिला का बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
दो बच्चों को नानी के घर छोड़कर जाने का मामला
बरारी थाना क्षेत्र में ऑटो चालक रंजीत साह ने अपनी पत्नी रीना देवी के घर छोड़कर चले जाने की शिकायत दर्ज कराई। रंजीत के अनुसार, रीना दोनों बच्चों को उनकी नानी के घर छोड़कर चली गई थीं। बाद में उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश मिला, जिसमें कथित तौर पर रीना ने उनके साथ नहीं रहने की बात कही थी।
रंजीत ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का पड़ोस में रहने वाले एक युवक से पिछले छह महीने से संबंध था और इस वजह से घर में अक्सर विवाद होता था। शिकायत के बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर रीना को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से बरामद किया।
हालांकि, बरामदगी के बाद रीना ने पति के साथ लौटने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंच गया। इस प्रकरण में भी आगे की कार्रवाई महिला के बयान और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के आधार पर की जानी है।
रिश्तों में बढ़ते तनाव की क्या हैं वजहें?
मनोविज्ञानी डॉ. राजेश कुमार तिवारी के अनुसार, वैवाहिक जीवन में संवाद की कमी, आपसी विश्वास का कमजोर होना, मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर विवाद, आर्थिक परेशानियां तथा पारिवारिक अपेक्षाओं में अंतर तनाव बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में पुराने प्रेम संबंधों का दोबारा जुड़ना या शादी के बाद पसंद-नापसंद को लेकर मतभेद भी रिश्तों में दूरी पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता विवाद समय रहते बातचीत और काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए किसी एक वजह को सभी वैवाहिक विवादों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
बालिग महिला के फैसले का सम्मान जरूरी
कानूनी दृष्टि से यदि कोई महिला बालिग है और अपनी इच्छा से किसी के साथ रहना चाहती है, तो उसके स्वतंत्र निर्णय को महत्व दिया जाता है। पुलिस किसी बालिग महिला को केवल पति के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर सकती है, लेकिन आगे की कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और महिला के बयान पर निर्भर करती है।
मनोविज्ञानी का कहना है कि वैवाहिक विवादों का असर केवल पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में पारिवारिक परामर्श और समय रहते संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
बरामदगी के बाद साथ लौटने के मामले कम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दर्ज मामलों में कई महिलाओं को बरामद किया जा चुका है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में केवल चार महिलाओं के पति के साथ लौटने की बात कही गई है। अन्य महिलाओं ने कथित तौर पर अलग रहने का फैसला किया। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच पारिवारिक परामर्श केंद्रों, महिला हेल्पलाइन और वैवाहिक विवादों के समाधान से जुड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रिश्तों में तनाव की स्थिति में समय रहते बातचीत, आपसी सहमति और जरूरत पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग से विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है।